देश में बिक रहे करीब 50 फ़ीसदी दूध में मिलावट पाई गई है यह खुद में काफी परेशान करने वाली खबर है जांच के लिए उठाए गए नमूनों में कच्चा और प्रोसैस्ड दोनों तरह के दो शामिल हैं देश में बिक रहे करीब 50 फ़ीसदी दूध में मिलावट पाई गई है यह खुद में काफी परेशान करने वाली खबर है जांच के लिए उठाए गए नमूनों में कच्चा और प्रोसेस दोनों तरह के दो शामिल है फसाई के सर्वे से यह खुलासा हुआ है
फसाई ने अपने सर्वे के लिए जो नमूने लिए उनमें से 50% तय मानकों के अनुरूप नहीं थे गनीमत काहे की इनमें केवल 10 फ़ीसदी स्वास्थ्य के लिए घातक थे जबकि उन 40 परसेंट की मिलावट पानी आदि की थी और वे सेहत के लिए नुकसानदेह नहीं थे सांख्यिकी के अनुसार वह भक्तों पर सर्वोपरि भारत देश में प्रति को दूध उत्पादन पड़ोसी पाकिस्तान से भी कम है जबकि ताइवान जैसे देश पोलैंड आदि को पटखनी देकर सर्वोपरि हैं जिस देश में प्रोसैस्ड दूध के 46.8 46.8 फ़ीसदी नमूने तय मानकों के अनुरूप नहीं थे और उनमें 17.3 फ़ीसदी सेहत के लिए खतरनाक थे जबकि कच्चे दूध के 45.4% नमूने तय मानकों के अनुरूप नहीं थे और उनमें 4.9 फ़ीसदी हेल्थ पर बुरा असर डालने वाले थे
पिछले महीने एनिमल वेलफेयर बोर्ड की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि देश में 68.7% दूध और दुग्ध उत्पादों में प्रदूषण कारी तत्व मौजूद हैं दूध में मिलावट की खबरें समय समय पर आती रहती है लगभग हर वर्ष की सुप्रीम कोर्ट गंभीर चिंता प्रकट करता है और केंद्र तथा राज्य सरकारों को समुचित निर्देश भी देता है लेकिन मिलावट पर रोक लगाने की बात किसी भी सरकार के एजेंडे पर नहीं आ रही है दिलचस्प बात यह है कि कुछ राज्यों ने आईपीसी में बदलाव कर इस मामले में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया है लेकिन इस मामले में किसी को छोटी सजा मिलने की खबर भी आज तक सुनाई नहीं थी कभी-कभार सरकार किसी कंपनी के खिलाफ कुछ करती भी है तो जल्द ही पता चलता है कि वैसा ही कर्म करने वाली बाकी कंपनियां नियमों में मौजूद छिद्रों का बेहतर इस्तेमाल करते अभी कैसी विडंबना है कि दूध जैसी अनिवार्य जरूरत की वस्तु तक हमें शुद्ध नहीं मिल रही है भारत एक शाकाहार प्रधान देश है और दूध यहां प्रोटीन का सबसे व्यापक स्त्रोत है पिछले कुछ सालों में भारत दूध उत्पादन के मामले में पूरी दुनिया में हो गया है यहां रोजाना 200000 गांवों में दूध एकत्रित किया जाता है और डेयरी उद्योग लगातार मजबूत हो रहा है जरूरत इसे व्यवस्थित रूप देने और ढंग से इस क्षेत्र का रेगुलेशन करने की है दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत जांच तंत्र बनाया जाना चाहिए अभी आलम यह है कि राज्यों ने जरूरी संख्या में फूड इंस्पेक्टर रोहतक की नियुक्ति नहीं की है फूडलैब्ज की भी भारी भारी कमी है जहां यह है अभी वहां इन में पर्याप्त कर्मचारी नहीं है एक रिपोर्ट आने में 6 महीने का वक्त लगता है यह खामियां दुरस्त करनी होगी लेकिन जिन कंपनियों के नमूनों में मिलावट पाई गई है उनके नाम तो अभी भी उजागर नहीं किए जा सकते हैं