बाल दिवस (लघु कथा )

मम्मी कल हमारे स्कूल में चिल्ड्रन डे सेलिब्रेशन है। बहुत सारे कार्यक्रम होंगे। बहुत मजा आएगा। 6 साल का हार्दिक देखते हुए बता रहा था।


          मम्मी ने कहा बेटा। क्या करोगे स्कूल जाकर? पढ़ाई तो होगी नहीं तुम्हारे पेंडिंग काम निपटा लेते हैं 15 दिन बाद मामा की शादी है। तुम्हारे लिए नए कपड़े खरीदने हैं। संडे की सारी दुकानें खुली नहीं मिलेंगे तुम्हारा आई टेस्ट भी करवाना है। मीठा मौसी भी आई हुई है कल तुम्हें उनसे भी मिल जाऊंगी हार्दिक उदास हो गया था। फिर बोला मम्मी टीचर बता रही थी कि देश के पहले प्रधानमंत्री का जन्मदिन है उन्हें चाचा नेहरू के बच्चों से बेहद प्यार  आज 55 दिनों के सेलिब्रेशन में सीमेंट सा गया है। और हमारे बचपन का हर दिन बिना सुविधाओं के बीच सेलिब्रेशन का। पापा खो से गए थे पुरानी यादोंथा हम एक गुलाब ले जाना कल। हार्दिक ने उम्मीद भरी नजरों से मम्मी की तरफ देखा तो कमरे में चली गई थी


हार्दिक ने पापा के डॉक्टर से आते ही फिर वही चर्चा छेड़ दी हमें बड़ी जिद्दी हो गया है आजकल यही नहीं पापा ने कहा बन गई टीम बहुत प्यारे होते हैं जिंदगी की दौड़ में दौड़ना शुरू करने से पहले जी भर के जी लो। वैसे भी आज ऐसी बेफिक्री नहीं है जैसे हमारे बचपन में थी। आज बचपन दिनों के सेलिब्रेशन में सीमेंट सा गया है। और हमारे बचपन का हर दिन बिना सुविधाओं के बीच सेलिब्रेशन का। पापा खो से गए थे पुरानी यादों में। मम्मी को भी बचपन याद आ गया था अपना कुछ कहने की जरूरत नहीं थी हार्दिक बाल दिवस की तैयारियों में जुट गया था